गाँव के बाहर की पगडण्डी / स. सुबह 9-10 बजे
राधे
[ 10 -11 साल का लड़का प्राइमरी स्कूल की पुरानी ड्रेस पहने जिसकी 2
बटने टूटी है | हाथ में कटोरा पकड़े, बगल में पुरानी किताब दबाए गाँव से बहार की
तरफ गुनगुनाते हुए जा रहा है | ]
मुन्न्नन्न्न्नन्न.......
कट टु
ठाकुर साहब
[ हाथ में स्टिक, तम्बा टीका लगाए हुए | साफ-शाही कपड़े पहने गांव के
बाहर घुमने निकले हैं | इधर-उधर नजरें दौड़ाते हुए एक नजर राधे पर पड़ जाती है
]
राधे
!.....राधे !....
[ ठाकुर थोडा आगे बढ़ते हुए स्टिक हिलाते हुए ]
राधे !.... ओ रधुआ
रेएएए !
कट टु
राधे
[ राधे ठाकुर साहब की तरफ देखता है | देखते ही एकदम गुनकुनाना बंद कर
खड़ा हो जाता है | ]
ठाकुर
[ चलकर
राधे के पास आते हुए / आ जाता है ]
कहाँ जा रहा है!... और तीन-चार दिन हो गए तुझे कोठी
पर क्यूं नही आया ?........ आज-कल कोई और दयालु हो रहा है तुझ पर हैं ? बोलता क्यूँ नहीं .... ठकुराइन जी गुस्सा
हो रहीं थी ! शिवम तीन-चार दिन से बहार घुमने के लिए रो रहा है | चल आज मछली खिलता हूँ तुझे । शिकार कर लिया पसियाने जोहड़ से....
कट टु
राधे
[ धीरे से आगे स्कूल की तरफ कदम बढ़ाते हुए
]
नही मैं स्कूल जा रहा हूँ !
कट टु
ठाकुर
[ स्टिक सँभालते हुए
और स्वयं संभलते हुए ( जैसे किसी ने कुछ छीन लिया हो ) ]
कोठी पर नही आया तो ठकुराइन जी बहुत गुस्सा होगीं | तुझे पता है न ! वो नाराज हो
जाएँगी तो तुझे गुड रोटी औ... टॉफी कौन देगा…..?
सीन- 2
समय- वही
[गांव से
स्कूल की तरफ जाती हुई पगडण्डी / सामने से उगता सूरज / कुछ
बच्चे स्कूल जाते हुए ]
राधे
[ स्कूल
जाते बच्चों के साथ बढ़ता हुआ| मद्धिम स्वर में ]
आप
की अछे से मालिश भी कौन करेगा ...........
ठाकुर
[क्रोधित होकर तेज़ आवाज में ]
राधे...!!
राधे
[ ठाकुर की बात
को अनसुना कर स्कूल की तरफ चलता हुआ ]
मै स्कूल में ही खा लूँगा...
(कैमरा कुछ देर तक जाते हुए राधे को पीछे से देखता है और बाद में उगता
हुआ सूरज को)